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Saturday, March 12, 2011

माधवगढ राष्ट्रीय उद्यान शिवपुरी की यात्रा

हर महीने के पहले सप्ताहांत में घुमने के लिए शहर से बाहर जाने का नियम सा बन गया है.  इससे पिछली बार रणथम्भोर राष्ट्रीय उद्यान गया था और उससे पहले माउन्ट आबू.   इस बार काफी सोचने के बाद भी मुझे व् मेरे मित्र राजा को कोई घुमने के लिए उपयुक्त स्थान नहीं मिल रहा था. (राजा तथा मैं दोनों ही घुमने निकलते हैं)

काफी सोच विचार के बाद हम दोनों मध्यप्रदेश के शिवपुरी के पास स्थित माधव नेशनल पार्क जाने का मन बनाया. इंटरनेट पर खोज करने पर ज्ञात हुआ की यह जगह हिरनों तथा टाइगर के लिए मशहूर है.

बस फिर क्या था, गूगल मैप्स से कोटा से माधव नेशनल पार्क जाने के रास्ते का प्रिंट निकाला, दोनों ने अपना अपना बेग उठाया कार स्टार्ट की और चल पड़े अपनी मंजिल की ओर.



दिन में तीन बजे निकले थे ओर बारां पहुँचते पहुँचते ही शाम हो गयी, अभी भी शिवपुरी वहां से १२५ किलोमीटर आगे था.  रात को शाहबाद के पास एक ढाबे पर गाड़ी रोकी ओर खाना खाया. चारपाई देखकर लेटने का मन किया, ओर लेट गए. काफी सालों बाद ढाबे की चारपाई पर सोया.




थोड़ी ही देर में मच्छर खाने लगे, गाड़ी के अन्दर सोने भागे. थोड़ी देर सुस्ताने के बाद मैंने राजा को सलाह दी की अब चलते है, रात को शिवपुरी पहुँच कर होटल कर लेते हैं. ओर फिर हम शिवपुरी के लिए रवाना हो गए. रात को दो बजे जाकर शिवपुरी के होटल में पहुंचे.

सुबह सुबह जंगल की ओर प्रस्थान किया, जानकर अच्छा लगा की जंगल में कार भी जा सकती है, लेकिन साथ में गाइड लेकर जाना पड़ेगा.   अब भैया हुआ क्या की शिवपुरी वालो को अतने मशहूर जगह का पता नहीं की कहाँ से जाया जाता है

आखिर कार काफी पुछाताछी करने के बाद मुख्य द्वार तक पहुंचे




फीस जमा करायी गाइड साथ में लिया ओर जा पहुंचे जंगल के अन्दर, अन्दर एक ओर बार चेकिंग हुई,

नीचे के चित्र में जंगल में बना हुआ रेसोर्ट




इसी जंगल के आरम्भ में सिंधिया द्वारा बनवाया हुआ बांध है जो की बरसाती पानी को एकत्रित करके रखता है, पूरा शिवपुरी इसका पानी पीता है.   ओर इसी के बराबर से जंगल में जाने का रास्ता है जिस पर मेरी कार जा रही है




इसी जगह का एक विडियो



जंगल में घूमते हुए मैं, राजा ओर हमारा गाइड राजेश कुमार






नीचे दिए गए चित्र में है शिकार बक्सा, यहाँ ऊपर से बकरा लटका कर सिंधिया शेर  का इंतज़ार करते थे, जब वो आता था तो वो उसका शिकार करते थे, अकेले उन्होंने सात सो शेर मार गिराए. इस जंगल में अब शेर नहीं हैं





इस जगह का विडियो



जंगल में हमें मादा सांभर का समूह मिला



थोडा बहुत ओर आगे बड़े तो हिरनों का परिवार मिला.  हिरन एक बार तो हमें देखकर सहम गए, लेकिन उसके बाद एक के बाद एक ने कार के आगे दोड़कर मार्ग के दूसरी ओर चले गए



जंगल में घुमने का मज़ा ही कुछ ओर है. इसी जंगल में पहाड़ी पर एक किला मोजूद है,   इसका नाम है  Geroge castle, इसका निर्माण जीवाजी राव सिंधिया ने इंग्लैंड के राजा जोर्ज पंचम के लिए करवाया था, वो यहाँ आकर शेर का शिकार करने आने वाले थे, वो यहाँ ठहरते, परन्तु उन्होंने रास्ते में शेर का शिकार कर लिया और यहाँ आये ही नहीं,
यहाँ आज हम आगये









यहाँ के कुछ विडियो, आओ किले के अन्दर चले





इसके बाद काफी देर तक जंगल में भ्रमण किया ओर जंगल के बाहर आगये. बाहर हनुमान जी का भव्य मंदिर है यहाँ आकर प्रभु के दर्शन किये.



ओर होटल जाकर वापस कोटा के लिए प्रस्थान किया.....

अगर आप भी यहाँ जाना चाहे तो जा सल्कते हैं.  बहुत अच्छी जगह है.. शिवपुरी में पुराने बस स्टैंड के पास बने होटलों में ठहरा जा सकता है. जंगल में घुमने का सबसे सही समय है प्रातः ६ बजे का क्यूंकि इसी समय सारे जानवर ज्यादा दिखाई देते हैं

अगले माह फिर कहीं ओर ओर उसका वृतांत यहाँ .......