Sunday, May 30, 2010
कुछ काम जो ऑनलाईन नहीं करना चाहिए
कुछ चीजें ऑन लाइन करने से दो काम हो सकते हैं
- व्यक्तिगत नुक्सान
- भविष्य में होने वाला पछतावा
ये है वो काम जो की ओंन लाइन नहीं करना चाहिए
अपना शरीर दिखाना - कुछ लोग मेसेंजर पर बैठकर अपने ऐसे शरीर का प्रदर्शन करते रहते हैं जो की बिलकुल प्राइवेट पार्ट्स है . मुझे समझ में नहीं आता की ऐसा क्यूँ करता है क्या मिलता है इससे. बस किसी का भी वेबकैम चलाओ तो पता चलता है की साहब ऐसी मुद्रा में बैठे हैं. बड़ा अजीब सा लगता है.
अजनबियों से गैर सार्वजानिक जगह पर मिलना - बचपन में हमें माता पिता द्वारा सिखाया जाता था की अजनबियों से बात नहीं करनी चाहिए कोई अजनबी लालच देकर साथ चलने को कहे तो नहीं जाना चाहिए या फिर किसी अजनबी से लिफ्ट नहीं लेनी चाहिए. लेकिन इन्टरनेट पर सबसे ज्यादा काम यही किया जाता है. अक्सर सुनने को मिलता रहता है की फलानी साईट पर किसी से मुलाकात हुई और उसके बाद फिर अनहोनी घटना घट गयी. आजकल ओंन लाईन डेटिंग का जमाना चल रहा है. सबसे ज्यादा धोखेबाज़ी इसी में होती है. अगर ओंन लाईन डेटिंग कर भी रहे हैं तो सावधान होकर करना चाहिए क्यूंकि अधिकतर सेवाएं माफिया गुंडों से सम्बंधित रहती हैं. अरे भाई कम से कम कॉमन सेन्स वाले लोगो से मिलो, डेट्स करो. दो तीन डेट्स के बाद लोग अपना असली पता बता दिया करते हैं और फिर ब्लेक मेल होते रहते हैं,
ट्रेवल प्लान का प्रचार - आजकल लोगों को न जाने क्या होता जा रहा है. कहीं जाना हो तो ट्वीट कर दिया घर पर नहीं हो तो ट्वीट कर दिया. सारी दुनिया को पता चल जाता है की घर में कोई नहीं है. चलो चोरी की जाये. कम से कम बच्चों को घर में अकेले छोड़ कर जा रहे हो तो मत बताओ दुनिया को. हादसे कभी भी हो सकते हैं.
पहचान बताने वाला डाटा शायर करना - ड्राइविंग लाइसेंस और आपको प्रमाणित करनी वाली कुछ भी वस्तुए नेट पर शेयर नहीं करनी चाहिए. नहीं तो कुछ दिनों बाद आपको पता चलेगा. कोई आपके नाम से ओंन लाइन है. उसका प्रोफाइल भी वेरीफाइड है . वो गलत काम कर रहा है. और बाद में पंगा फंसने पर आपको चिल्लाना पड़ रहा है की वो आप नहीं हो.
दोष प्रकट करना - नेट पर कभी भी अपनी बीमारियों कमजोरियों का खुलासा नहीं करना चाहिए. जैसे की नेट पर कई प्रकार के सर्वे होते है जिसमे यह बता दिया जाता है की आप कितना सिगरते पीते हैं आप कितना शराब पीते हैं. या कोई रोग कबसे आपको है या किसी भी प्रकार का दोष. क्योंकि आजकल इन्स्योरंस कम्पनियाँ भी काफी चालक हो गयी है. पता चले की भारी भारी प्रीमियम भर के आपने इन्स्योरंस कराया और किसी घटना पर आपको क्लेम नहीं मिल रहा क्योंकि ये बीमारी तो आपको पहले से ही थी. या आप शराब का सेवन करते हैं. और फिर इन्स्योरंस कंपनियों को तो सब जानते है ही.
अपने धंधे के सहयोगी या सहकर्मियों के बारे में लिखना- लोग अपने काम धंधे बिजनेस या अपने बॉस के बारे में ट्वीट कर दिया करते हैं, और फिर सुनने को मिलता है की जिससे बिजनेस जुड़ा था या फिर आपके बॉस ने आपके ट्वीट को पड़ लिया. पता चला की नौकरी चली गयी या फिर धंधे में नुक्सान हो गया.
अपने दोस्तों के साथ की गयी पार्टी के शर्मनाक फोटो/वीडियो शेयर करना - दोस्तों के साथ की गयी पार्टी में क्या क्या हुआ. स्विंमिंग पूल के पास हुई पार्टी में क्या क्या हुआ, वाईन पार्टी में क्या क्या हुआ इन सबको नेट पर डालने की क्या ज़रुरत है? हम जानते हैं की इन सब पार्टी में कितनी गजब की मस्तियाँ हो जाती है जो की सिर्फ पार्टी तक ही सीमित रहनी चाहिए. कैसा लगेगा आपको जब ये सब आपका एम्प्लोयर देखले? आपके बच्चे देख लें? आपकी पत्नी देख ले? या आपके पोते-पोती देख ले?
तो फिर क्या सोचा आपने ये सब कुछ पढके, जल्द ही अपनी प्राईवेसी सेत्तिंग्स बदलिए, और कुछ अमल करिए......
Saturday, June 03, 2006
क्या आत्मा अजर अमर है?
आत्मा अजर अमर होती है। शरीर नाशवान है वह मरता है परन्तु आत्मा कभी नहीं मरती है। यही हमें बचपन से ही सिखाया जाता है।
आत्माएं शरीर बदलती रहती है। आत्माओं के लिये शरीर मात्र एक किराए के मकान की तरह होता है। जब वे इसे छोडती हैं तो शरीर
को मृत मान लिया जाता है।
इसका मतलब हम आत्माए हैं जो इस शरीर में रह रहै है। किसी दिन हम इस शरीर को छोड देंगे।
लेकिन जब सभी जानते हैं कि आत्माएं नहीं मरती तो फिर किसी के मरने पर इतना रोना धोना क्यों होता है।
दुनिया की जनसंख्या क्यों बढ रही है?
यह बात भी आश्यर्य की है कि दुनिया की जनसंख्या क्यों बढ रही है जबकी आत्मा तो अजर अमर है। आत्माएं शरीर बदलती है इससे
मानव का जीवन मृत्यु का खेल चलता है, तो इस नियम के अनुसार तो जनसंख्या नहीं बढनी चाहीये न। क्योंकी जो मर रहा है वो
कुछ दिनों बाद फिर जन्म ले रहा है, तो फिर इतनी पापूलेशन कैसे बढी।
हम भारतीय 35 करोड से एक अरब कैसे होगये?
क्या नई नई आत्माएं जन्म ले रही है?
उदाहरण के तोर पर भारत देश में 1940 के समय लगभग 35करोड की जनसंख्या थी। इसका मतलब 35करोड आत्माएं 35करोड
शरीरों में रह रही थी। तो फिर ये जनसंख्या उत्तरोत्तर आगे कैसे बडती गई। तो क्या लगातार आत्माएं भी जन्म ले रही थी?
ये बात मेरी समझ से परे है
क्या आत्माएं भी आपस में शादी करके बच्चे पैदा कर रही है?
तभी तो एक अरब आत्माएं हो गई है।
इसका मतलब सरकार को आबादी नियंत्रण के ये जनता को समझाने कि बजाय आत्माएं को समझाना चाहिये कि वो आत्माएं पैदा न
करें। बैचारे शरीर फालतु ही बदनाम हो रहै हैं जनसंख्या वृद्धी के लिये।
Thursday, May 18, 2006
ऐसा भी होता है
क्या लिखे वो?
आज मेरे साथ यही समस्या हुई। लिखने की इच्छा हुई और विषय नहीं ढूंढ पाया कि किस पर लिखा जाए।
तब मुझे एक आईडीया आया।
मैने सोचा कि जब कुछ नहीं आरहा तो क्यो न दुसरों के चिठ्ठे पढूं।
और जब चिठ्ठे पढे तो सोचा कि क्यों न इसी विषय पर लिख दुं कि विषय नहीं मिल रहा है।
और ठोक दी यह पोस्ट।
अब किसी को इसे पढकर मजा आये न आये, मुझे तो लिखने में बहूत मजा आया।
झेलो भई झेलो
हा हा हा